तीर्थराज प्रयाग में मां गंगा और कल्पवास – MA GANGA & KALPWAS
पंक्ति पावन परिवार कल्पवास एक संकल्प की यात्रा है। इस यात्रा मे त्याग , तप, जप, स्नान, दान और भक्त समागम का पुनीत अवसर मिलता है। नियमानुसार एक माह तक प्रयाग के बाहर नही जाना होता है।
एक समय भोजन होता है और प्रातः सायं गंगा स्नान । व्यवस्था मे सामर्थ्य के अनुसार लोग आते है और नियम का पालन करते हुए दान धर्म का पालन करते हुए कल्पवास पूर्ण करते हैं। यहाँ सबका एक ही लक्ष्य होता है त्याग। सनातन परम्परानुसार हर वर्ष मेले मे लाखों-लाख लोग आते है त्याग करके जाते है।
प्रयाग की महिमा सबसे महान है। माता सीता वनवास जाते समय गंगा जी से निवेदन करती है कि हे माँ ऐसी कृपा कीजिये कि हम सब साथ लौट कर आऊंगी फिर आप का पूजन करूंगी ।
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